Badi Mushkil Se Biwi Ko Teyar Kiya – Part 19

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iloveall 2017-02-23 Comments

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मैं, “मुए शक है की वह कोई दूसरी औरत के चक्कर में हैं। ”

नीना, “तुम्हें कैसे पता? अनिल के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया है?”

मैं, “वह मुझसे अब अचानक ज्यादा प्यार करने लगे हैं।” मेरा वाक्य मुझे ही बड़ा अजीब सा लग रहा था। नीना का स्तंभित होना स्वाभाविक था।

नीना बड़े ही आश्चर्य से बोली, “क्या? अनिल तुम्हें ज्यादा प्यार करने लगे हैं, और तुम्हें लगता है की वह किसी और स्त्री के चक्कर में है? यह कैसी गुत्थी है? वह औरत कौन है?”

मैं कुर्सी पर सकपका रही थी। मैं नीना की कैसे समझाऊँ की परेशानी की जड़ तो वह खुद ही थी? बड़े असमंजस मैं कहा, “नीना, मैं कैसे बताऊं? मुझे अजीब सा लग रहा है। ”

तब नीना ने मुझे बड़ी ही असमंजस में डाल दिया। वह बोली, “और वह औरत मैं हूँ। सही है या गलत?” मैंने कुछ भी न बोलते हुए अपनी मुंडी हिला कर “हाँ” का इशारा किया।

मेरी बात का बुरा मानने, आश्चर्य प्रकट करने या मेरे साथ तक वितर्क करने के बजाय नीना मेरे और करीब आयी और मुझसे लिपट गयी और बोली, “हाँ, तुम सही हो। तुम्हारा पति मेरे पीछे पड़ा है। पर क्या तुम्हें पता है की मेरा पति तुम्हारे लिए कितना पागल है?”

मैं क्या बोलती? अब कठघरे में खड़े रहने की बारी मेरी थी। मैं बिना बोले असमंजस में नीना की और एकटक देख रही थी की वह क्या बोलेगी। तब नीना ने मेरी नाक अपने हाथ में पकड़ कर बड़े प्यार से धीरे से उसे दबाते और मेरा सर इधर उधर हिलाते हुए बोली, “अरे इस में मेरे पति राज का क्या दोष निकालूं? तुम हो ही इतनी खूबसूरत।” फिर एकदम खुल कर हँस पड़ी और बोली, “अगर में मर्द होती और राज की जगह होती तो मैं तो शायद तुम्हे अबतक मेरे बच्चोँ की माँ ही बना चुकी होती।”

मैं क्या बोलती? स्वयं इतनी अति सुन्दर स्त्री जब मेरी इतनी प्रशंशा करे तो भला मैं क्या बोल सकती थी? मैंने दबे हुए स्वर में कहा, “नीना बस भी करो। मेरी टांग मत खींचो। तुम तो मुझसे कहीं ज्यादा खूबसूरत हो। तुम्हारे सामने तो मैं कुछ भी नहीं। ”

नीना फिर थोड़ा रुक कर बोली, “मेरी प्यारी अनीता भाभी। अब मैं आपको बताती हूँ की बात क्या है।”

धीरे से एक गहरी साँस लेकर नीना ने कहा, “सीधी स्पष्ट बात और आजकी समस्या यह है की हम दोनों के पति एक दूसरे की बीबी से बहोत आकर्षित हैं, और वह हम दोनों से शारीरिक सम्भोग करना चाहते हैं। अब सवाल यह ही की हम पत्नियां क्या करें?”

नीना की इतनी सीधी और स्पष्ट बात सुनकर मेरे चेहरे से तो जैसे हवाइयां उड़ने लगी। मैं क्या बोलती? नीना की बात तो एकदम सही और सटीक थी। मैं चुप रही तो नीना ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा, “देखो, मैं जानती हूँ की तुम और अनिल ने मिलकर एक ब्लू फिल्म देखि थी, जिसमें दो पति अपनी पत्नोयों की अदलाबदली करतें हैं। जब अनिल ने तुमसे ऐसे ही करने के बारेमें आग्रह किया तो तुमने अनिल को शायद फटकार दिया था। यह बात मैंने दरवाजे के पीछे छिपकर मेरे पति राज और अनिल के आपसी संवाद में सुनी थी। अनिल तुम्हारी फटकार से बड़ा दुखी था और राज को कह रहा था की उसका मन करता हैकि वह कोई वेश्या के पास जाए।” नीना इतना बोलकर चुप हो गयी।

मेरे आश्चर्य का कोई ठिकाना न रहा? क्या, मेरा पति अनिल वेश्या के पास जाएगा? क्या मैं उसे शारीरिक सुख दे कर संतुष्ट नहीं कर पा रही थी? मेरा सर भिन्ना रहा थ। मैंने दबे हुए स्वर में पूछा, “बापरे! यह आप क्या कह रही हो? क्या अनिल ऐसा सोच रहा है? अनिल वेश्या के पास जाएगा? मेरा तो घर ही बर्बाद हो जायेगा। नीना दीदी, तुम्ही बताओं हम अब क्या करें?”

नीना ने बड़े गम्भी स्वर में कहा, “देखो तुम मेरी छोटी बहन जैसी हो। जैसे तुम किसी भी हालात मैं यह नहीं चाहोगी की मेरा घर बर्बाद हो। वैसे ही मैं भला तुंम्हारा घर बर्बाद कैसे होते देख सकती हूँ? कुछ भी हो जाय हमें हमारे पतियों को हमारे पल्लू में ही बाँध कर रखना है ना? हमें उन्हें हमारे दोनों के घर के दायरे से बाहर जाने नहीं देना चाहिए। इसी में हम सब की भलाई है। इसके लिए चाहे हमें कोई भी समझौता क्यों न करना पड़े। तुम क्या कहती हो? मैं ठीक कह रही हूँ या गलत? बोलो।”

मैंने कहा, “बात तो सही है। पर तुम कहना क्या चाहती हो?”

नीना बड़े आत्मविश्वास के साथ बोली, “मैं यह कहना चाहती हूँ की हमें हमारे पतियोँ की बात मान लेनी चाहिए। मैं नहीं चाहती की हमारे पति कोई वेश्या के चक्कर में पड़ें। इसी लिए मैं तुम्हें कहती हूँ की अनिल की बात मान लो और राज के साथ सम्बंध बनाने में झिझक न रखो। मैं राज की पत्नी होकर भी तुमसे यही कह रही हूँ, क्योंकि इसी में हम सब की भलाई है की बात हमारे दोनों के बिच में ही रहे। बल्कि यह तो अच्छा है की बात अभी हमारे दोनों के बिच में है और हम दोनों बहनें मिलकर उसे सुलझा सकते हैं। वरना हमारे घर बिखर भी सकते हैं।“

नीना की बात मैं एकदम बड़े ध्यान से सुन रही थी। अब तो बात इस हद तक पहुँच चुकी थी की मुझे कुछ न कुछ निर्णय तो लेना ही था। और निर्णय क्या लेना था? पतियों की बात तो माननी ही पड़ेगी। वरना तो कहते हैं की “रायता फ़ैल जाएगा। ” अगर हमारे पति वेश्याओं के पास जाने लगे तो पैसे और इज्जत दोनों की बर्बादी तय थी। और फिर मेरे पति अनिल का क्या भरोसा? किसी वेश्या के साथ उसका मन लग गया तो कहीं वह उस वेश्या को मेरे घर में लाकर खड़ा न कर दे? यह सोच कर मैं काँपने लगी। पर सवाल यह था की फिर मै ही क्यों पहल करूँ। क्या नीना पहल नहीं कर सकती? वह मुझसे बड़ी भी तो थी?

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