Bejati Ka Badla, Bhabhi Ko Chod Kar Liya – Episode 2


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Deep punjabi 2018-03-25 Comments

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नमस्कार दोस्तों, यह है मेरी हिन्दी सेक्स कहानी का अगला एपिसोड, पढ़िए और मजे लीजिए!

करीब 10 बजे मीना छत पे आ गई और मेरे कमरे का दरवाजा हल्के से खटखटाया। मैंने दरवाजा खुला होने की आवाज़ दी और वो अंदर आ गई और दरवाजा अंदर से लोक कर लिया । अंदर आते ही उसने मुझे ज़ोर से जफ्फी डाल ली और मैंने उसे बैड पे ही लिटा लिया। उसकी सांसे तेज़ चल रही थी।

वो — दीप, यहां कोई डर वाली बात तो नही है न, मतलब यहां तुम्हारे घर का कोई आएगा तो नही ना।

मैं — नही सुबह 7 बजे तक तो कोई नही, फेर माँ आएगी चाय देने।

वो — (लम्बी चैन की साँस लेते हुए) — फेर कोई बात का डर नही है। हम आराम से अपनी करवाई डाल सकते है।

ऐसा करो हमारे पास 1 घण्टे का वक्त है। इतने समय में अपने दिल की हर एक रीझ पुगालो। सुबह बच्चों को स्कूल भी भेजना है। सो मुझे जल्दी जाना पड़ेगा। मेरे घर में होते तो कोई जल्दी वाली बात नही थी।

मैं – लेकिन आज तो राकेश भी आने वाला था न, फेर… ??

वो — माँ चुदाये अब राकेश… हा..हा.. हा सुबह बोल दूँगी के तुम टाइम पे नही आये तो मैं क्या कर सकती हूँ। छोडो तुम ये बातें अपने काम में मन लगाओ। वरना उसके चक्र में अपना मज़ा भी फीका करवा लोगे। ऐसे करो एक एक करके मेरे कपड़े उतारो।

हम धीमी सी आवाज़ में बाते कर ही रहे थे के अचानक मेरे कमरे का दरवाजा खटकने की आवाज़ आई। हमारे तो जैसे पैरों तले ज़मीन निकल गई हो। मैंने जल्दी से उसे बैड के निचे छिपाया और सोकर उठने की एक्टिंग करता हुआ दरवाजा खोलने के लिए आ गया। जब दरवाजा खोला तो बाहर माँ दूध का गिलास और प्लेट में कुछ मिठाई लिए खड़ी थी।

माँ — क्या हुआ दीप बेटा, सो गए थे क्या ?

मैं– (जम्हाई लेने की एक्टिंग करके) – हाँ माँ सुबह कॉलेज जल्दी जाना था, इस लिए जल्दी सो गया।

माँ — आज तो तुम दूध पीना ही भूल गए। मेने सोचा चलो मैं खुद पकड़ा आती हूँ और आज दोपहर को शहर से तेरे मौसा जी आये थे, उनके घर बेटे ने जन्म लिया है। तो वो मिठाई का डिब्बा देकर गए है। दिन में तुम्हे मिठाई देना भूल गयी। सोचा शाम को दूध के साथ दे आती हूँ। ये लो प्लेट और गिलास पकड़ लो और आराम से खा पीके सो जाना।

मैंने अपनी माँ से वो खाने पीने का समान पकड़ लिया और माँ को बाहर से ही वापिस मोड़ दिया। फेर जल्दी से दरवाजा बन्द करके हल्के से मीना को आवाज़ लगाई के बाहर आ जाओ खतरा टल चूका है। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

वो जब बैड के निचे से बाहर निकली तो पसीने से भीगी हुई थी। मैंने उसे बैड पे बिठाके पानी पिलाया और पंखे की हवा में आराम करने का आग्रह किया। करीब 10 मिनट में जब वो नॉर्मल हुई तो बोली,” आज तो तुमने मरवा ही दिया था। समय रहते यदि मैं छिपती न तो मेरी तो इज़्ज़त की धज़्ज़ियाँ उड़ जाती। इतनी कठिनाई तो कभी मैंने, मेरे असली पत्नी जीवन में कभी नही देखी..

एक घण्टे में से 20 मिनट तो आंटी ने खराब कर दिए। अब जल्दी करो, मेरे जाने का वक़्त नज़दीक हो रहा है। बच्चे भी छोटे है न शायद खुद को अकेले पाकर डर न जाये, मुझे उनकी भी फ़िक्र हो रही है।

चलो जल्दी करो मेरे कपड़े उतारो, मैं तुम्हारे उतारती हूँ।

उसकी इस बात से मुझे आइडिया आया क्यों न आज की रात “सुहागरात” की तरह मनाई जाये, ताजो आज की रात बरसो तक एक सुनहरी याद बनकर याद रहे।

मैंने अपने दिल की बात मीना को बताई। वो बोली,” आज की रात तुम्हारी हूँ, जैसे भी दिल करे करलो।

मैंने उसे बैड पे दुल्हन की तरह घुंगट निकालकर बैठने को कहा। वो मान गयी। फेर मैं भी दूल्हे की तरह दरवाजे की तरफ से आया और उसके पास आकर बैठ गया। हल्के से उसका घुंगट उठाकर मुंह दिखाई की रस्म निभायी। फेर मैंने मुंह दिखायी में उसे अपने पर्स से कुछ पैसे दिए। फिर हमने इकठे एक गिलास से ही दूध पिया और मिठाई भी खायी।

फेर मैंने धीरे धीरे उसके ओर अपने सारे कपड़े उतारे और उसको लिटाकर माथे से लेकर निचे पैरो तक एक एक अंग को बड़ी शिद्दत से चूमा। मेरी ये हरकत आग में घी का काम कर रही थी। मतलब उसपे काम धीरे धीरे असर कर रहा था।

उसकी आँखे बंद थी और मुंह से हल्की हल्की आह.. सी.. सी.. आह… जैसी कामुक सिसकिया निकल रही थी। उसने मुझे आँख बन्द किये ही बोला, “पतिदेव अब और न तरसाओ, मैं काम अग्नि में जल रही हूँ। मेरी प्यास बुझादो प्लीज़… आह्ह्ह…

मैंने उसे और तड़पाने का प्लान बनाया और उसके होंठो को अपने होठो में भींचकर उनका रसपान करने लगा। करीब 10 मिनट ऐसे ही स्मूच करने के बाद मैंने उसके बड़े बड़े बूब्स पे टूट पड़ा। मैंने दोनो हाथो से उसे बारी बारी से पकड़कर उनको चूमा और हल्के से उनकी निप्पलो को काटा।

उसकी तो जैसे जान निकले जा रही थी। फेर मैं उसके एक दम स्पॉट पेट से होता हुआ उसकी क्लीनशेव चूत पे पहुँच गया। उसपे हल्की हल्की बदबू आ रही थी।

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