Bejati Ka Badla, Bhabhi Ko Chod Kar Liya


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Deep punjabi 2018-03-25 Comments

नमस्कार मित्रो.. आपका अपना दीप पंजाबी आपकी सेवा में एक नई कहानी लेकर हाज़िर है। पिछली कहानियो को पसंद करने के लिए और ढेर सारे मेल भेजने के लिए आप सब मित्रों का बहुत बहुत धन्यवाद।

ज्यादा बाते न करते हुए सीधा आज की कहानी पे आते है। जो के मेरी पड़ोसन भाभी और मेरे बीच हुए सेक्स के बारे में है। उमीद है आपको बहुत पसंद आएगी। हुआ यूं के मेरे घर के बिलकुल पीछे घर में रहने वाली भाभी जिसे हम मीना के नाम से जानेंगे। उसकी उम्र यही कोई 25 के करीब थी।

उसका अफेयर गांव के ही किसी राकेश नाम के लड़के से चल रहा था। तो वो अपने पति के फोन से ही कभी कबार छिप छिपाके उस से बाते कर लेती थी। एक दिन मैं बाइक से कही काम से जा रहा था तो उसने मुझे आवाज़ लगाई,” दीप एक मिनट बात सुनकर जाना।

मैं रुक गया और उनसे मुझे रोकने की वजह जाननी चाही।

वो — कृप्या एक मिनट के लिए तुम्हारा फोन देना तुम्हारे भाई संदीप (उसका पति) को लगाकर पूछना है, के काम से कब तक वापिस आएंगे ?

मैंने उनका बताया हुआ नम्बर डायल करके उनको फोन दे दिया। वो फोन को मुझसे करीब 20 फ़ीट की दूरी पे ले गयी और धीमी सी आवाज़ में 5 मिनट तक पता नही क्या बात की और फोन वापिस दे दिया। मैं अपने काम पे चला गया।

करीब हफ्ते बाद एक दिन ऐसे ही रात को अपने कमरे में अकेला लेटा हुआ था और फोन में लोड ज्यादा होने की वजह से फालतू की फाइल्स को हटा रहा था। तो अचानक उस दिन वाली फ़ाइल सामने आ गयी । मैंने उसे प्ले करके सुना तो हैरानी से मेरा मुंह खुले का खुला ही रह गया। उन दोनों की बात कुछ इस तरह की थी…

वो — हलो राकेश, मैं मीना बोल रही हूँ। ध्यान से मेरी बात सुनो।

राकेश — हाँ, मीना डार्लिंग बोलो।

वो — पागल, यहाँ जान या डार्लिंग न बोलो। किसी पड़ोसी लड़के का फोन लिया है बात करने के लिए बहाने से के अपने पति से बात करनी है। ये फोन वाला बहुत खडूस स्वभाव का व्यक्ति है। इसे जरा सा भी शक न होने देना। इसे जरा सा भी कोई शक हो गया तो हमारी खैर नही होगी। ऐसे करना आज मेरे पति, मेरी ननद के यहां गए है। वो 5-7 दिन के बाद वापिस आएंगे..

ऐसा करना आज रात को मैं तेरा इंतज़ार करूंगी। तुम वही पुराने समय पे आ जाना। बच्चों के सो जाने के बाद हसीन रात का मज़ा लेंगे। खाने पीने का मैंने इंतज़ाम कर लिया है। ज्यादा देरी से न आना। हो सकता है मैं इंतज़ार करती करती सो जाऊ और तुम्हे ऐसे ही बेरंग वापिस जाना पड़े।

राकेश — तुम टेंशन न लो मेरी छमक छल्लो, मैं वक्त पे पहुँच जाऊंगा। तुम बस माहौल को रंगीन बनाने का इंतज़ाम रखना, बाये जानेमन…

वो– बाये… ठीक है, बाद में बात करती हूँ। अब फोन वाला घूर घूर के देख रहा है। उसे फोन वापिस देना है ।

और फोन काट दिया।

ये रिकॉर्डिंग सुनकर मेरे तन बदन में आग लग गयी। गुस्से के मारे उन्हें बहुत गालियाँ दी और उनके द्वारा किये दुर व्यवहार का बदला लेने की सोची। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

एक दिन फेर वही भाभी मेरे घर पे आई और आते ही मुझे नमस्ते बोला, मुझे उसकी शक्ल देखते ही गुस्सा चढ़ने लगा। लेकिन समय की नज़ाकत को समझते हुए चुप रहने में ही फायदा समझा। मन में सोचा के यदि तुम्हे ही अपना लण्ड न चुसवाया न मेरा नाम भी दीप नही।

वो — दीप, तुम्हारा फोन देना, तुम्हारे भाई साहब को अपनी बहन के यहां गए हुए एक हफ्ता होने वाला है। उस दिन के बाद न कोई फोन आया और न कोई संदेस, मुझे उनकी बहुत चिंता हो रही है। प्लीज़ ये पर्ची वाला नम्बर डायल करके दे दो। ज्यादा बात नही करूंगी बस इतना ही पता करना है के कब तक आयेंगे। क्योंके शाम का वक़्त है, यदि वो आने का बोलेगे तो उनके आने से पहले खाना वगैरह बनालूंगी।

मुझे उस दिन की रिकॉर्डिंग सुनकर पता चल गया था के आज भी वही रासलीला होने वाली है। क्यों न आज के दिन का मज़ा लिया जाये और खुद से हुए दुरव्यवहार का बदला लिया जाये। मैंने नम्बर डायल करके फोन उनको सौंप दिया।

आज भी मुझसे करीब 10-15 फ़ीट दूर होकर बात कर रही थी। मेने उसकी बात पे कोई ध्यान नही दिया। क्योंके सब कुछ रिकॉर्ड हो रहा था। वो बात करके अपने घर चली गयी। उसके जाने के बाद मैंने अपने कमरे में जाकर वो रिकॉर्डिंग प्ले करके सुनी।

वो — हलो राकेश, आज का क्या प्रोग्राम है ?

राकेश — वही जो एक हफ्ते से चल रहा है। लेकिन आज तो संदीप ने वापिस आना था। फेर कैसे हम इकठे हो पाएंगे।

मीना — वो नही आएगा, मैंने दोपहर को किसी और के फोन से उसे फोन किया था। वो बोला,” कल शाम तक आऊंगा। ऐसे करना आज जल्दी आ जाना। कल को भी तुम बहुत देरी से आये थे। जिसकी वजह से नींद खराब हो जाती है। बच्चे 9 बजे तक सो जाते है। आज 9.30 तक आ जाना..

ताकी जल्दी से काम निपटा कर सो सके। सुबह जल्दी उठकर बच्चों को स्कूल भी भेजना होता है। आज भी मैं देरी से जागी थी। जिसकी वजह से आज बच्चे बिन नाश्ता किये ही स्कूल चले गए। बा की बाते रात को करूंगी… वही खडूस का फोन है और मुझे घूर के देख रहा है.. हा.. हा.. हा.. हा.. हा हा…

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