Badi Mushkil Se Biwi Ko Teyar Kiya – Part 21

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iloveall 2017-02-27 Comments

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हालांकि मुझे पूरा अंदेशा तो था की उस समय तक मेरा पति नीना को चोद चूका था। मेरे पतिके और नीना के वर्तन से मुझे साफ़ नजर आ तो रहा था; पर मेरा मन यह मानने के लिए तैयार नहीं हो रहा था। मैं रुक गयी। जाने अनजाने मैं में बिस्तर में आ गयी और थोड़ा सा पलट कर राज के सामने अपना चेहरा कर प्रश्नात्मक दृष्टि से राज की और देखने लगी। राज ने मेरी और देखा और फिर धीरे से बोले, “विश्वास नहीं होता? अब मैं तुम्हें स्पष्ट रूप से बताता हूँ की तुम्हारे पति अनिल और मैंने मिलकर नीना को थोड़ी शराब पिलाकर और काफी मशक्कत करके पटा लिया और हमारे साथ मैथुन के लिए राजी कर लिया। होली की रात को जब तुम दिल्ही गयी थीं तब हम तीनों ने मिलकर आपके घर में इसी पलंग पर खूब सेक्स किया था।”

उस समय मैं कुछ बोलने के लायक ही नहीं रही। मुझे आश्चर्य नहीं हुआ। पर मेरे मन का एक कोना जैसे टूट गया। यही बात अगर मेरे पति मुझसे कहते तो मुझे इतना बुरा न लगता। हाँ, अनिल ने मुझे अश्पष्ट रूप से तो कह ही दिया था की मुझे राज के साथ संभोग करना चाहिए। इसका अर्थ यह हुआ की जब वह नीना को चोद ही चुका था तो भला वह मुझे कैसे मना कर सकता था? उस दिन नीना ने भी जरूर बातों बातों में इसका संकेत मुझे दे दिया था।

उस समय मैं नीना को साफ़ साफ़ पूछ न सकी की क्या वह मेरे पति से चुद चुकी थी? अगर मैं पूछ ने की हिम्मत न रख पायी तो नीना मुझे वह बताने की हिम्मत कैसे जुटा पाती?

मेरे मष्तिष्क में जैसे तूफ़ान सा उठ रहा था। क्या राज मुझे कही फुसलाने के लिए तो यह कहानी नहीं बना रहे थे? मैं जानती थी की राज सच बोल रहे थे। ऐसी बातों में झूठनहीं बोला जाता अथवा मजाक भी नहीं किया जाता। पर फिर भी मेरा मन मान नहीं रहा था।

मैंने झिझकते हुए पूछ ही लिया, “राज क्या तुम सच कह रहे हो?”

राज ने कहा, “मुझे जो कहना था कह दिया, अब आगे तुम सोचो की क्या मैं सच कह रहा हूं या झूठ।” मैं जानती थी की राज शत प्रतिशत सच बोल रहा था। मैंने तब राज से पूछा, “क्या तुम मुझे पसंद करते हो?”

राज मुंह बनाते पूछा, “अब ताने मारने की बारी मेरी है। भाई अगर कोई मर्द आपके स्तनोँ को जोर से दबाये और आपको प्यार भरा चुम्बन करके अपनी इच्छा जताए तो क्या उसे ऐसा सवाल पूछना चाहिए?”

राज ने तुरन्त ही अपनी पतलून खोली और निचे खिसका दी। उसने अपने लन्ड को अपनी नीकर से बाहर निकाला और मेरे हाथ में अपना मोटा, लंबा और तना हुआ लन्ड थमा दिया और बोला, “क्या तुम्हें मैं पसंद करता हूँ ऐसा इसे पकड़ने से लगता है?”

राज के इस अचानक कदम से मैं एकदम सहम गयी। पर क्या करती? मैं अनायास ही मेरे हाथमें आया हुआ राज का लन्ड सहलाने लगी। वास्तव में उसका लन्ड ऐसे खड़ा हुआ था जैसे एक सैनिक “अटेंशन” का आर्डर सुनकर खड़ा होता है। उसका लन्ड न सिर्फ लंबा और काफी मोटा था बल्कि एकदम कड़ा जैसे कोई लोहे की छड़ हो। और वह ऊपर की और मेरी तरफ देख रहा था जैसे वह मुझे रिझाने के लिए बिनती कर रहा हो।

राज का लन्ड चिकनाई से लथपथ था। उसका पूर्वद्रव्य धीरे धीरे उसके लन्ड के छिद्र में से निकल कर उसके लन्ड के पुरे घिराव में फ़ैल रहा था। जैसे ही मेरी उंगलियां उसको सहलाने लगीं तो उसके लन्ड के छिद्र में से तो जैसे धारा ही निकल ने लगी। मैंने उसे थोड़े जोर से सहलाना शुरू किया तो राज के मुंह से “आह..;” निकल पड़ी। मैंने राज के अंडकोषों को प्यार से सहलाया और मेरी उँगलियों से उसे मैं बड़ी नजाकत से मालिश करने लगी और हलके से दबा कर उसे प्यार से हिलाने लगी।

“राज मैं एक बात पूछूँ? क्या तुम मुझे सच बताओगे?” मैंने पूछा।

“कहो, मैं सच बताऊंगा।” राज ने कहा।

“तुम्हारी वाइफ नीना से अगर मेरे पति ने सेक्स कर ही लिया है, तो फिर हम क्यों इतना परेशान हो रहे हैं? उनको मज़े करने दो। अनिल नीना पर चढ़ा था तो फिर हम मज़े क्यों न करें? मैं भी तुम्हारे लिए उसी दिन से तैयार थी जिस दिन तुम और मैं मेरे बाथरूम में नलका ठीक कर रहे थे। मैंने उस दिन तुम्हारा उठा हुआ लिंग तुम्हारी निकर में देखा था। अगर उस दिन तुम मुझे पकड़ लेते और कुछ भी करते तो मैं तैयार थी। अनिल मुझे कई दिनों से उकसा रहे थे मैं भी एक नए पुरुष का मझा लूँ। पर मेरी हिम्मत ही नहीं हो रही थी।”

राज मेरी बात ध्यान से सुन रहे थे। उसने थोड़ी झिझक के साथ मुझे पूछा, “क्या मैं एक बात कहूँ? देखो अब हमारा संबंध देवर भाभी से आगे निकल चूका है। अब एक दूसरे से फालतू की शर्म रखनी नहीं चाहिए। अब तुम सेक्स, साथ में सोना, लिंग जैसे सभ्य शब्दों का प्रयोग छोडो और चोदना, लन्ड, चूत जैसे शब्द, जो की बिलकुल सही हैं उसे प्रयोग करो।

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