Sumit Aur Uska Parivar – Part 4

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Dilwala Rahul 2016-06-26 Comments

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(चुदाई के बाद ऋचा और उसका बड़ा भाई सुमित दोनों अपने अपने कपडे पहनते हैं और ऋचा सो जाती है और सुमित अपनी माँ के कमरे में सोने चला जाता है जहाँ नाईट बल्ब जला था, उसकी माँ भावना बेड पर लेटी थी और उसकी नाईटी उसकी मोटी सुडौल गोरी झांघों तक सरक गयी थी.

90 प्रतिशत गोरे भारी तरबूझ जैसे बूब्स नाईटी से बाहर थे, बाल बिखरे हुए थे, आधे से ज्यादा निप्पल दिख रहे थे, मोटी ताजी गोर कामुक बदन की मालकिन भावना खर्राटे मार रही थी,ये दृश्य देखकर सुमित का मन और लन दोनो डोलने लगते है.

सुमित का लण्ड अपनी माँ की ये मदहोशी में सोयी हुयी हालत को देखकर खड़ा हो जाता है, और सुमित घूर घूर कर अपनी माँ के आधे से ज्यादा बूब्स को और मोटी गोरी मखमली बालों से भरी जांघों को एकटक देखता रहता है और अपना लण्ड पैजामे के बाहर से ही मसलता है, थोड़ी देर पश्चात सुमित भावना के बगल में खड़े लण्ड के साथ लेट जाता है.

सुमित के अपनी माँ के बगल में लेटने से भावना की नींद खुल जाती है और वो अपनी नाईटी सही करती है, निकले हुए बूब्स को संभालती है, माँ-बेटे के रिश्ते को व्यवस्थित रखने की पूरी कोशिश करती है)

(भावना और सुमित एक दूसरे की तरफ मुह करके बातें करने लगते हैं, भावना के 50 प्रतिशत बूब्स अभी भी बाहर ही थे और सांसों के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे, छोटा बेड होने की वजह से भावना और सुमित पास पास एक दूसरे की तरफ मुह करके बात कर रहे थे, माँ-बेटे की सांसे एक दूसरे से टकरा रही थी)

भावना- आ गया बेटा, इतनी देर क्यों करी? कितना गेम खेलते हो तुम दोनों भाई बहन.

सुमित- हाँ माँ वो थोडा देर हो गयी, आप तो गहरी नींद में सोये हुए थे.

भावना- हाँ वो नींद आ गयी थी, चल अब तू भी सोजा, इतनी बदबू क्यों आ रही है तुझ से, तू नहाया नही क्या ट्रेन में जो हुआ उसके बाद ?

सुमित- नहाया था माँ, लेकिन ट्रेन में इतना सारा पता नही किसने डाला, उसकी बदबू शायद अभी तक है.

भावना- कंजर हरामी लोग थे ट्रेन में, मुझे पहले से पता था, शक्ल ही कमीनों वाली थी उनकी, बेशर्म कहीं के.

सुमित- हाँ माँ, सही बोल रही है तू. वैसे एक बात पूछूँ?

भावना- पूछ बेटा.

सुमित- आपको मजा आया सफ़र में?

भावना- हाँ बेटा बहुत मजा आया था, क्या बताऊँ, उन अंकल ने जो मुझे सीट दी बैठने को उसके बाद ज्यादा मजा आया.

सुमित- वैसे जब आखिरी सुरंग आई थी तो उन अंकल की और आपकी अजीब अजीब सी आवाज़ें आ रही थी, ऐसा क्यों माँ?

भावना- अरे उस समय पता नहीं चूहा जैसे कुछ घुस गया था मेरे पेटिकोट के अंदर, उसने तूफ़ान मचा दिया था बेटा, अगर मैं हल्ला करती तो सब डर जाते कहीं ट्रेन में बम तो नहीं है, लेकिन मेने हिम्मत से काम लिया और चूहे के जाने का इंतज़ार किया, सुरंग खत्म होने के बाद चूहा चला गया.

सुमित- वाह माँ, कितनी बहादुर हो आप, शेरनी हो.

भावना- वो तो हूँ ही बचपन से, लेकिन आजतक घमंड नहीं किया बेटा.

सुमित- माँ जब आप ऋचा के रुम में मेरी गोद में बैठी थी तो बहुत मजा आ रहा था.

भावना- मजा कैसे आ रहा था तुझे? मैं समझी नहीं?

सुमित- मतलब एक अलग अहसास हो रहा था, मेरा शरीर थका हुआ है ना, तो आप मोटी हो, मेरी जांघों के ऊपर आप बैठी थी तो मसाज हो गयी थी.

भावना- अच्छा जी, ऐसा है, अभी तेरे ऊपर लेट जाऊं क्या? पूरी बॉडी की मसाज हो जायेगी.

सुमित- अगर ऐसा हो जाये तो सोने पे सुहागा हो जाये माँ.

भावना- चल हट… बदमाश, मैं तो मजाक कर रही हूँ.

सुमित- आप भी ना माँ, ऐसा अच्छा मजाक करती हो. वैसे आप कितनी ज्यादा मोटी हो सही में, आपके दूध भी काफी बड़े हैं माँ.

भावना- बदमाश मेरे दूध देखता रहता है तू हाँ, बचपन में इन्ही को चूसता रहता था तू.

सुमित- मैं इतने बड़े टैंकर से खत्म कर देता था क्या दूध?

भावना- और नहीं तो क्या, चुस चूस कर लाल कर देता था निप्पल, जब नहीं पिलाती थी तो रो रो कर बुरा हाल कर देता था, बड़ा शैतान था बचपन से, जब तू बड़ा हुआ तब थोड़ा मेरी चुच्चियों को आराम मिला बेटा.

सुमित- माँ इतनी बड़ी चुच्ची को किसी का भी मन चूसने का करेगा, अभी भी देखो बाहर दिख रही है, आप जब भी मार्किट या कहीं भी जाती हो आपकी चुच्चियां आधी बाहर दिखती हैं माँ, सब लोग आपकी चुच्चियों को घूरते रहते हैं.

भावना- तो क्या हुआ, चुच्चियां तो औरतों की शान होती है, जितनी बड़ी चुच्ची मतलब उतने ही अच्छे घर से है.

सुमित- मेरे छोड़ने के बाद किसी ने आपकी चुच्ची चूसी माँ?

भावना- ये कैसा गन्दा सवाल कर रहा है बदमाश, (शरमाते हुए)- हाँ तेरे पापा चूसते हैं जब छुट्टी में आते हैं घर.

सुमित- मुझे तो अभी भी आपकी चुच्ची चूसने का मन होता है माँ.

भावना- तुझे तो मैं कभी न चुसाऊं अपनी चुच्ची, बचपन में छोड़ता नहीं था, अब तो बड़ा हो गया है अब तो बिलकुल भी नहीं छोड़ेगा.

सुमित- नहीं माँ अब मैं कम चुसुंगा, पिला दो प्लीज…

(भावना सुमित की छाती में बालों में हाथ फेरती है)

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