Badi Mushkil Se Biwi Ko Teyar Kiya – Part 13


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iloveall 2016-09-03 Comments

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अनिल का स्निग्ध चिकनाहट भरा लण्ड मेरी बीबी की चूत में घुस तो गया, पर जैसे ही अनिल ने एक धक्का देकर उसे थोड़ा और अंदर धकेला तो नीना दर्द से चीख उठी। उसने अनिल को पीछे हटाने की कोशिश की। अनिल ने अपना अंदर घुसा हुआ लण्ड थोडा सा वापस खिंच लिया। मेरी सुन्दर पत्नी ने एक चैन की साँस ली।

पर अनिल ने फिर एक धक्का मारा और अपना लण्ड फिर अंदर घुसेड़ा। नीना के मुंह से फिर चीख निकल गयी। फिर अनिल ने थोड़ा वापस लिया और फिर एक धक्का मार कर और अंदर घुसेड़ा।

तब मैंने देखा की मेरी पत्नी अपनी आँखे जोर से बंद करके, अपने होठ भींच कर चुप रही। उसने कोई चीख नहीं निकाली, हालांकि उसे दर्द महसूस हो रहा होगा। नीना के कपोल पर पसीने की बूंदें झलक रही थी। आज तक मेरा लण्ड कभी भी मेरी पत्नी की चूत की उस गहरायी तक नहीं पहुँच पाया था, जहाँ तक अनिल का लण्ड उस रात पहुँच गया था।

अनिल और मेरी सुन्दर एक रात की छिनाल पत्नी अब एक दूसरे से आनंद पानेकी कोशिश कर रहे थे। धीरे धीरे नीना का दर्द कम होने लगा होगा। क्योंकि अब वह दर्द भरे भाव उसके चेहरे पर नजर नहीं आ रहे थे। उसकी जगह वह अब अनिल के धक्कों के मजे ले रही थी।

अनिल ने धीरे से अपनी चोदने की रफ़्तार बढ़ाई। साथ ही साथ वह मेरी बीबी के मम्मों को भी अपनी हथेली और अंगूठों में भींच रहा था। नीना मेरे मित्र के इस दोहरे आक्रमण से पागल सी हो रही थी। तब मेरी बीबी को शायद थोड़ा दर्द, थोड़ा मजा महसूस हो रहा होगा। अनिल की बढ़ी हुयी रफ़्तार को मेरी बीबी एन्जॉय करने लगी थी।

अनिल के अंडकोष मेरी पत्नी की गांड पर फटकार मार रहे थे। उनके चोदने की फच्च फच्च आवाज कमरे में चारो और गूंज रही थी। नीना ने तब कामातुरता भरी धीमी कराहट मारना शुरू किया। वह अनिल के चोदने की प्रक्रिया का पूरा आनंद लेना चाहती थी। शायद कहीं न कहीं उसके मन में यह डर था की क्या पता, कहीं उसे अनिल से दुबारा चुदवा ने का मौका न मिले।

नीना ने उंह्कार मारना शुरू किया तो अनिल को और भी जोश चढ़ा। अब वह मेरी बीबी की चूत में इतनी फुर्ती से अपना मोटा और लंबा लण्ड पेल रहा था की नीना अपना आपा खो रही थी। उधर जैसे ही अपना लण्ड एक के बाद एक तगड़े धक्के देकर अनिल मेरी बीबी की चूत में पेलता था, तब अनायास ही के उसके मुंह से भी “ओह.. हूँ.. ” की आवाजें निकलती जा रही थी।

मेरी पत्नी और मेरा मित्र दोनों वासना के पाशमें एक दूसरे के संग में सारी दुनिया को भूल कर काम आनन्दातिरेक का अनुभव कर रहे थे। पुरे कमरे में जैसे चोदने की आवाजें और हम तीनों के रस और वीर्य की कामुकता भरी खुशबु फैली हुई थी।

नीना की उंह्कार तेज होने लगी। अब वह दर्द के मारे नहीं पर उत्तेजना और कामाग्नि के मारे हर एक धक्के पर कराह रही थी। जैसे जैसे वह अपने चरम शिखर पर पहुँच रही थी वैसे वैसे नीना ने जोर से कराहना शुरू किया और फिर अनिल को और जोरसे चोदने के लिए कहने लगी।

‘अनिल, मुझे और चोदो। और जोरसे। मेरी चूत का आज भोसड़ा बना डालो। रुकना मत। मैं अब झड़ने वाली हूँ। चोदो मुझे। हाय.. आह.. बापरे… ऑफ़..” ऐसे कराहते हुए मेरी बीबी उस रात पता नहीं शायद चौथी या पांचवी बार झड़ी।

नीना के झड़ने से अनिल जैसे ही थम रहा था वैसे ही मेरी बीबी ने उसे लताड़ दिया। “अरे तुम रुक क्यों गए? मैं झड़ी हूँ पर अभी भी खड़ी हूँ। खैर, पीछे हटो। चलो अब मैं तुम्हें चोद्ती हूँ।” ऐसा कह कर मेरी बीबी ने अनिल का हाथ पकड़ कर उसे पलंग पर लेटाया।

खुद वह अनिल के ऊपर चढ़ गयी और उसकी दोनों टाँगों को फैला कर अपनी दोनों टांगों को अनिल की फैली हुयी टांगो के बिच रख कर अपनी टांगों को टेढा कर अपने घुटनों पर बैठ गयी। धीरे से नीना ने अनिल का तना और मोटा लण्ड अपनी चूत के अंदर डाला और उसे अपने शरीर को नीचे की और दबा कर अंदर घुसेड़ा।

धीरे धीरे जैसे नीना अपने चूतड़ों को ऊपर निचे उठाने लगी, वैसे ही अनिल भी निचे से अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर नीना की चूत में अपने लण्ड को घुसेड़ रहा था। पर नीना को कोई दर्द नहीं बल्कि उसके चेहरे पर एक अद्भुत आनंद की लहर दौड़ रही थी। वह उस रात हमारी सेक्स की स्वामिनी बनी हुई थी। अनिल और मैं हम दोनों जैसे नीना के सेक्स गुलाम थे, और वह हमारी मलिका।

मैं हैरान इस बात पर था की कोई भी आसन में या पोजीशन में अनिल नीना के मम्मों को छोड़ने के लिए तैयार ही नहीं था। उसने मेरी बीबी के स्तनों पर जैसे अपना एक मात्र अधिकार जमा रखा था। मैं अनिल का नीना के मम्मों के प्रति पागलपन को समझ सकता था। जब एक इंसान इतने महीनों से जिस के सपने देखता हो। जो इतने महीनो से जिसको पाने के लिए जीता हो और वह उसे मिल जाए तो भला उसे आसानी से कैसे छोड़ेगा?

मेरी पत्नी पर तो जैसे चुदने का बुखार चढ़ा था। वह उछल उछल कर अनिल को चोद रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वह पूरी रात अनिल को नहीं छोड़ेगी। उनकी रफ़्तार इतनी तेज हो गयी थी की मैं डर रहा था की कहीं उसके शरीर पर उसका विपरीत असर न हो जाय।

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