Sheetal.. Ek Chudakkad Customer


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Deep punjabi 2016-08-21 Comments

उसने मुझसे मेरे बारे में पुछा तो

मेने अपना परिचय दिया फेर मेने उससे उसका परिचय माँगा तो वो बोली के वो अपने पति और 3 साल के बेटे के साथ रहती है। उसका पति एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता है, जो सुबह 8 बजे काम पे जाता है और रात को 9 बजे के बाद ही घर आता है। कई बार तो दो तीन दिन आते ही नही है। अभी भी एक हफ्ते से घर नही आऐ है।

मैं — मैडम आपका बेटा कही दिख नही रहा ?

वो (इशारा करते हुए) — उधर पालने में सो रहा है।

मैं — एक बात पूछु मैडम ?

वो (खाली कप टेबल पे रखते हुए ) — हांजी पूछिए ?

मैं — मैडम अकेले घर पे आपका दिल कैसे लगता है ?

वो (ठंडी आह भरते हुए) — अंदर आकर मेने शटर है दीप जी,

कभी मोबाइल तो कभी टीवी से दिल बेहला लेती हूँ।

मैं — टीवी में तो फिल्में, सीरीयल आते है, पर मोबाइल से कैसे ??

वो — नेट से कई साइट्स पे जाती हूँ और….

मैं — और मतलब ?

वो — ह्म्म्म… कुछ नही और हंसने लगी।

मैं– बताओ भी और क्या ?

वो — आप तो पीछे ही पड गए। मुझे नही बताना मुझे शर्म आती है।

मैं — क्यों शर्म क्यों ?

वो — पहले आप बताओ आप नेट पे क्या करते हो?

मैं — मैं तो फेसबुक वटसप्प या फेर सेक्सी कहानिया पढ़ता हूँ।

मेरी बात सुनकर उसकी हंसी निकल गयी और बोली.. सेम टू मी।

मैं — मतलब आप भी उसकी तरफ ऊँगली करके पूछा

वो — क्यों क्या सिर्फ मर्द लोगो को ही पढ़ने में मजा आता है।

हम औरते इंसान नही है क्या, हमारी कोई फीलिनग्स नही है। बोलो..

मैं — नही मेने तो ऐसी कोई बात नही बोली।

वो — आप सोचो जिसका पति दो तीन दिन पास न हो, वह अपना मन बहलाऐे तो कैसे?

मेने शरारत से कमेंट किया.. आगे से जब भी दिल न लगे, मुझे बुला लेना ।।

वो — वो क्यों ???

मैं — आपका दिल बेहला देंगे थोड़ा हंसी मज़ाक करके ।

वो — देखलो अपनी बात से मुकर न जाना ।

मैं — नही मुकरेँगे आप एक बार मौका तो दो ।

वो एक तो पहले से ही सेक्स की आग में जल रही थी ऊपर से मेरी बाते आग पे पेट्रोल डालने का काम कर रही थी।

वो बोली, चलो आज ही तुम्हारी परीक्षा ले लेते है। जिस से पता चल जायेगा । वाकया में ही चैंलेज के लायक हो भी या नही।

मेने कहा, आज़माकर देखलो।

वो बोली, मेरे पीछे आओ !!

मैं उसके पीछे चला गया !

अपने बेडरूम में ले जाकर बोली, बैठो यहाँ और खुद बाहर आकर मेन गली वाला दरवाजा बन्द करने आ गयी। वापिस कमरे जाकर बोली हाँ तो आप मन बहलाने का कुछ बोल रहे थे।

तो बहलाइये न मैं आपके सामने खड़ी हूँ। मैं तो ऐसा मौका ढून्ढ ही रहा था के कब वो पहल करे।

मेने जल्दी से उसको पकड़ा और दीवार से लगाकर उसके होंठों पे अपने होंठ रखकर उन्हें चूसने लगा। एक दम हमले से वो सम्भल न स्की और निचे फर्श पे ही गिर पड़ी।।

मेने उसे उठाकर बैड पे लिटाया और सोरी बोला और पूछा कही लगी तो नही। वो बोली हाँ लगी है बहुत ज़ोर की ।

मेने पूछा कहाँ ?

वो चूत पे हाथ रखकर बोली यहा.. और हम हस पड़े।

मेने उसे किस करना शुरू किया। वो भी मेरा साथ देने लगी। मैं कपड़े के ऊपर से ही उसके सुडोल मम्मो को मुठियो में भींचने लगा।

वो बोली रुको कमीज़ निकालने दो पहले।

मेने सोचा उस दिन गलती से हाथ ममे पे लगा था इतना अच्छा महसूस हुआ था आज जान बूझकर लगाउँगा तो कैसा लगेगा?

उसने कमीज़ और सलवार दोनों उतार दिए। उसने निचे कुछ भी नही पहना था न ब्रा और न पैन्टी ।

मेने भी अपने सारे कपड़े निकाल दिए।

अब मैं झुककर उसके गोरे मम्मो को चूमने लगा और निप्प्ल्स को मुह में लेकर उनका मीठा दूध पीने लगा। वो मस्त होकर अपना दूध पिला रही थी। मेने बार बार दोनों मम्मो को सहलाकर दूध पिया।

वो शरारत भरे अंदाज़ में बोली, दीप सारा न पियो नही तो मेरा लल्ला भूख रह जायेगा और हाहाहाहाहा करके हंस पड़ी।

मेने उसके मम्मे छोड़कर निचे की तरफ सरकना शुरू किया।

एक दम स्पॉट पेट छोटी सी अंदर धँसी नाभि बड़ी सेक्सी लग रही थी।

मेने जैसे ही उसके पेट पे होंट लगाकर किस किया, वो मज़े में आकर मौन करने लगी और बोली..

आआआह्ह्ह्ह्ह.. हट जाओ दीप प्लीज़ बदन में कुछ कुछ होता है। अब उसकी शेव की हुई चूत पे आकर उसको सुंघा। एक अजीब सी खुशबु नस नस में काम जगा रही थी। मेने बांये हाथ का अंगूठा अंदर घुसाना चाहा। जिस से उसकी सीसकिया में बढ़ोतरी हो गयी। कसी हुई चूत के बिलकुल बीच में चमड़े का एक टुकड़ा लटक रहा था। जिसको सहलाने से शीतल रोमांच से गदगद हो गयी और बोली दीप चाटो न आप मेरी चूत।

मैं उसकी आज्ञा का पालन करते हुए उसके चमड़े के टुकड़े को जीभ से चाटने लगा।

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