Najayaz Sambandh – Masti Ya Barbaadi

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neeliamforlove 2017-03-10 Comments

वह बाजु की खिड़की पे झाड़ू पड़ा था उठा के जैसे 3 इडियट्स में आमिर खान को बोमन ईरानी ने छाते से हाथ पे मारा था

वैसे ही मुझे करन ने जोरो से झाड़ू से मारा

और तब की रात का खाना चुपछाप हुआ सुबह अंश की छुटी थी तो करन ने सासु माँ और अंश को किसी रिश्तेदार की वहा भेजा

उन लोगो के जाते ही

करन : लगा तेरे यार को फोन

में : नहीं

तभी नसीब की करनी के नील का फोन आया

करन : देखो आशिक को याद करते ही माशूका को फोन किया

करन ने बोला स्पीकर पे रखता हु उसे बुला

करन ने उठाया

नील : में आ रहा हु

मै: ह्म्म्म

और करन उसके आने की राह देखने लगे

जब नील आया उसके बाद क्या हुआ वह तो आप लोगो को पता है

उसके बाद….

करन नील के पीछे भाग के मार के आया आते ही मुझे अपने पास बिठाया

करन: सॉरी

मैंने सिर्फ उसके सामने देखा और फिर नजरे झुका ली

करन: में ततुमे मारना नहीं च्चाहता था पर ततुम ही बताओ ककीसको ऐसी हरकत पे गुस्सा नहीं आएगा

मैंने ततुमें किसी चीज से वंशीत रखा? ककीतना प्यार ककरता हु,, फफिर भी ततुमने ऐसा किया???

मै करन को जोर से लिपटकर रोने लगी

मै: सॉरी,, में बहक गयी थी,,,, रस्ता भूल गयी थी,,,,, किसीसे मोहित हो गयी थी

और करन से लिपट कर रोती रही

करन मुझे शांत करा रहा था कोई बात नहीं लौट के बुध्धू घर आये

पर में दिन भर रोती रही जब भी करन का चेहरा देखती रो पड़ती

तब मन में ऐसा लगता की उसने पुरे मजे लिए पर जब बीवी के रूप में अपनाने की बात की थी तो उसने बात टाल दी थी यानि वह उसका प्रेम नहीं सिर्फ हवस थी

और एक और मेरा पति जो इतना कुछ होते हुए भी मुझे अपना रहा है फिर भी मुझसे प्यार करता है

यह मेने क्या कर दिया में तो अपनी ही नजरो में गिर गयी

रात में खाने के वक़्त

जब मेरे मुह से एक निवाला भी अन्दर नहीं जा रहा था तब करन ने मुझे अपने हाथ से खाना खिलाया

और फिर से में रोने लगी तब करन ने बोला हम यह सोसायटी छोड़ देंगे ताकि तुम नयी ज़िन्दगी शरु कर शको

मै: हम क्यु जाये? जायेगा तो वोह

फिर दुसरे दिन में उसके फ्लैट जाके खटखटाया

उसने दरवाजा खोला मैंने अन्दर जाते ही बोली

जितनी जल्दी हो शके तुम यहा से कही और चले जाओ इस एरिया से निकल जाओ क्युकी मेरे पति ने पूरा बदला लेने का सोच रखा है वह सिर्फ दीखते शांत है पर मेरे ससुराल वाले बड़े पहचान वाले है और चली आई

तब मैंने नोटिस की के मेरे हाथ पे निशान थे उसने देखा पर पूछा भी नहीं वह उसकी सोच रहा था की यहा से निकलू, जब उसने मेरे निशान की ओर देखा तब में बोली : तुम तो भाग गये मैं कहा जाऊ, तब वह बिल्कुल चुप रहा और मैं वहा से निकल आई

दुसरे दिन जब देखा तो करन बाहर खड़े थे

कहानी पढ़ने के बाद अपने विचार निचे कोममेंट सेक्शन में जरुर लिखे.. ताकि देसी कहानी पर कहानियों का ये दोर आपके लिए यूँ ही चलता रहे।

में जब बाहर आई तो देखा की नील अपना सामान टेम्पो लोड करवा रहा था यानि वो घर छोड़ के जा रहा था

मैंने करन के कंधे पे सर रखा और करन साइड से लिपटी और करन ने मेरे माथे को चूमा, और यह सब नील जाते जाते देख रहा था

आज तक यह तो पता नहीं चला की करन कैसे पता चला (सहेली,ससुमा, अंश,साड़ी या फिर वह बूढ़े दादाजी) पर एक बात समज में आई बुरे का अंजाम बुरा होता है

अगर यह कहानी पसंद आई तो कृप्या अपना सुझाव “[email protected]” पे भेजे, अब जल्द ही एक महत्व घटना लेके आऊंगा जो अलग और शीख देनेवाली होगी.

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