Himanchali Mami Rupa Ki Kabz


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Dilwala Rahul 2016-06-16 Comments

मैं- बहुत हो गया मामी, आप पाद मारे जाओ और मैं सूँगता जाऊं, ये कहाँ का न्याय है.

मामी- तो तू भी मार ले पाद, तुझे किसी ने मना किया है.

मैं- नहीं मेरा पेट साफ है, आपके पेट को सफाई की जरुरत है, कायम चूर्ण नहीं है क्या?

मामी- नहीं है.

मैं- तो फिर एक ही उपाय बचा. मुझे कब्ज ठीक करने आती है लेकिन शायद आपको ये तरीका पसंद न आये.

मामी- क्या तरीका है भांजे, कब्ज के लिए मैं सारे फॉर्मूले अपनाने को तैयार हूँ, तू बता बस.

मैं- उसके लिए पाद का पूरी तरह से बाहर निकलना बहुत जरुरी है और ऐसा तभी होगा जब आपके पीछे का छेद बड़ा होगा.

मामी- क्या बोल रहा है बेशर्म, शर्म कर थोडा.

मैं- मेने पहले ही बोला था कि आपको उपाय पसंद नही आएगा, कोई बात नहीं, इसके अलावा कोई तरीका नहीं है, आपकी कब्ज की दिक्कत पूरी ज़िन्दगी भर रहेगी.

मामी- शुभ शुभ बोल बेशर्म. उपाय बता कैसे होगा छेद बड़ा, मेरा तो बहुत छोटा है.

मैं- इसके लिए मुझे आपके छेद का गहन अध्ययन करना होगा, आप मुझे छेद दिखाओ अपना पहले. मैं छेद देखने के बाद ही बता सकूँगा.

मामी- चल हटटट बदमाश कहीं का, तेरे सामने पैजामा कैसे उतारूँ मैं, मुझे शर्म आती है.

मैं- तो फिर शर्म करते रहो मामी, आपकी कब्ज कभी दूर नहीं होगी.

मामी- अच्छा अच्छा ठीक है, लेकिन पहले दरवाजा बंद करदे कोई आएगा तो ठीक नहीं लगता.

(मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था, मेरी अनपढ़ मामी मान गयी, मेने दरवाजा बंद किया और मामी ने अपना पैजामा उतरा, दोस्तों क्या बताऊँ, मामी के मोटे पैरों में जांघ तक हलके हल्के बाल हैं जो मामी की गोरी मोटी सुडौल मख़मली टांगों की शोभा बढ़ा रहे हैं, पिछवाड़े में एक काला तिल है जो मामी की गांड को गन्दी नजर से बचा कर रखता है, मामी गांड फैला कर उलटी लेट गयी है)

मामी- जल्दी छेद बड़ा कर मेरा ताकि कब्ज दूर हो.

मैं- मामी अपनी टाँगे और चौड़ी कर, छेद दिख नही रहा है.

(मामी ने गांड चौड़ी करी तो एक छोटा सा छेद मुझे दिखा जिस में मामी का थोडा सा मल लगा हुआ है और मामी के छेद से बहुत ही गन्दी दुर्गन्ध आ रही है लेकिन अब वही जानलेवा दुर्गन्ध मुझे खुशबु सी लगने लगी. मेरे नाक में प्रवाहित होकर दिमाग में वो खुशबू बस गयी और अब मेरे अंग अंग में उसका जादू चढ़ गया, एक नशा सा जैसे अफीम में होता है वैसा ही नशा मामी की गांड के छेद से आ रही बदबू से मुझे चढ़ गया, मेने अपनी 1 ऊँगली मामी की गांड के छेद के अंदर डाली और फिट करदी और मामी की चीख निकल गयी)

मामी- हाये… अह्ह्ह्हह्ह क्या करता है भांजे…

मैं- ऐसे ही उलटी लेती रह तू मामी, सुराख बड़ा कर रहा हूँ ताकि पाद ज्यादा मात्रा में निकले.

मामी- ओहह्ह्ह्हह्ह कर करररर….

(मेने ऊँगली बाहर निकाली तो मामी को आराम मिला)

मैं- अब जरा पाद तो मामी, कितनी निकल रही है देखता हूँ.

मामी- तूजे कैसे पता चलेगा रे?

मैं- सूंघकर, तू पाद तो मार.

(मेने अपनी नाक मामी की गांड के छेद के बिलकुल करीब लगा दी जिससे पाद सूंघने में आसानी हो, मामी ने जोरदार पाद मारी पुरर्रर्रर्रर्रर्रर्र.. जिसकी हवा मेरे नाक में प्रवाहित हुयी और मुझे बहुत ही मजा आया)

मैं- अह्ह्ह्ह्ह, वाह्ह्ह्ह्ह…

मामी- क्या हुआ रे, वाह्ह क्यों कर रहा है, पाद अच्छी लगी क्या? ज्यादा आई या कम?

मैं- हाँ मामी अच्छी लगी, अभी कम आई, अब में तेरे छेद में दो ऊँगली डालूँगा तब देखते हैं कितनी आती है.

मामी- डाल डाल…जल्दी डाल.. आज कब्ज दूर नही करी तो तुझे रात भर पाद सुँघाऊँगी.

मैं- सुंघा देना मामी, आशिक हो गया मैं तेरी पाद का आज तो.

मामी- हाये रे, कितना हरामी है तू, बदमाश कहीं का.

मैं- वो तो मैं बचपन से हूँ मामी.

(इसके बाद मैं दो उंगलिया गांड में डालता हूँ और पाद सूंघता हूँ, ऐसे करते करते एक बारी 4 उंगलिया डालता हूँ और जोरदार पाद का बफका सूँगता हूँ)

मामी- उफ्फ्फ्फफ अब दर्द होने लग गया, साड़ी उंगलिया डाल दी तूने, अब कुछ फर्क पड़ा क्या?

मैं- मामी पाद ज्यादा तो आई लेकिन उतनी नही जितनी मैं चाहता था, कब्ज अभी दूर नहीं हुयी है.

मामी- तो अब कैसे होगी कब्ज दूर, चारों उंगलिया तो डाल दी तूने.

मैं- एक ऊँगली बची है मामी.

मामी- कौन सी?

मैं- अभी डालता हूँ लेकिन तू आँख बंद कर दे और उठना मत और न ही पीछे देखना वरना कब्ज जिंदगी भर दूर नहीं होगी और तू हिमांचल की वादियों को ऐसे ही सड़ाती रहेगी.

मामी- नहीं देखूंगी तू डाल दे 5वीं ऊँगली भी.

मैं- ठीक है मैं 5वीं ऊँगली भी घी में डालता हूँ.

(मेरा लण्ड बिलकुल रोड की तरह खड़ा था जिसको किसी भी हालत में छेद चाहिए था, मेने अपना पैजामा खोला और खड़े लण्ड में थूक लगाया और मामी की गांड के छेद में डाल दिया जिससे मामी की चीख निकल गयी)

मामी- हाये मा…गयी मैं तो…. कितनी बड़ी ऊँगली है ये तेरी, कहाँ सम्भाल के रखा था इसे?

मैं- अह्ह्ह्हह्ह तू ऐसे ही रह… अब मैं ऊँगली अंदर बाहर करूँगा, तुझे दर्द होगा लेकिन घबराना मत, अगर घबरा गयी तो कब्ज दूर ना होगी समझ ले और न ही पीछे देखना.

मामी- उफ्फ्फ्फफ दर्द हो रहा है अभी से भांजे, जो भी करना है जल्दी कर लेकिन कब्ज दूर करदे.

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