Vijay Aur Uski Malkin Nirmla

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Deep punjabi 2016-08-30 Comments

मालकिन – ये लो विजय तुम्हारे साब जी के कपड़े है ध्यान से हिफाज्त करना इनकी फटने नही चाहिए, और एक बात किसी को ऐसा न महसूस होने देना के तुम हमारे नौकर हो, हमे आज नए अस्पताल में जाना है। उनसे ऐसे वयवहार करना के तुम ही जमीदार हो, इससे हमारी भी इज्ज़त बनी रहेगी।

विजय – ठीक है मालकिन !!

(विजय उन कपड़ो को पहन कर खुद ज़मीदार साब लग रहा था)

(दोनों गाड़ी में बैठकर अस्पताल चले गए)

डॉक्टर ने दोनो को हम उम्र होने की वजह से पति पत्नी समझ लिया और पुरानी रिपोर्ट्स को पड़कर बोले – हाँ तो राजेन्दर जी, आप बैठो और आपकी पत्नी को जरा बाहर ही बैठने को बोलो..

(ज़मीदार बने विजय ने वैसा ही किया)

डॉक्टर – हाँ तो राजेन्द्र जी, आपकी रिपोर्ट के हिसाब से आप में कमज़ोरी की वजह से आपके वीर्य में शुक्राणु बनने की प्रकिर्या बहुत धीमी है।

ज़मीदार – क्या मतलब आपका डॉक्टर साब ?

डॉक्टर – मतलब साफ़ है आपकी बीवी की रिपोर्ट आपसे मिलाकर देखी है, उनमे कोई कमी नही है। कमी आपमें है, पर आप चिंता न करो मैं कुछ दवाइया लिख देता हूँ, इनके सेवन से आप कुछ ही महीनो में शरीर में आई कमज़ोरी से बाहर निकल जाओगे।

ज़मीदार – ठीक है डॉक्टर साब..

जमीदार डॉक्टर के कॅबिन से बाहर आ जाता है और उसकी पत्नी यानि मालिकिन पूछती है – क्या बोला डॉक्टर ने विजय ?

विजय – बात यहाँ बताने वाली नही है। रस्ते में बताऊंगा आपको अब चलो यहां से मालकिन।

मालकिन – ठीक है चलो।

दोनों गाड़ी में बैठकर घर की तरफ रवाना हो जाते है।

मालकिन – अब बोलो क्या बोला डॉक्टर ने ?

विजय (एक साइड पे गाड़ी रोककर) – डॉक्टर ने कहा के आप ज़मीदार साब से कभी माँ नही बन पाओगे। मैं तो ज्यादा पढ़ा भी नही हूँ । आप खुद ही देखलो। साफ साफ लिखा है के उनके वीर्य में औलाद पैदा करने के कण नही है।

अब मालकिन आँखे फाड़-फाड़ कर उस रिपोट को देख रही है, और आँखों से आंसुओ को नदी बेह रही है।

विजय – सम्भालो अपने आप को मालकिन, सब ठीक हो जायगा। डॉक्टर ने दवाईया लिखकर दी है। जिनके सेवन से मालिक ठीक हो जायेंगे।

मालकिन – तुम नही जानते विजय तुम्हारे मालिक कितने गर्म स्वभाव के है। अगर उनको ये बात पता चली तो कुछ कर बैठेंगे। क्योंके ये उनकी इज़्ज़त का स्वाल है। तुम भी ये बात किसी से न कहना वरना हमारे खानदान की बहुत बदनामी होगी। मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ। ये बात हम तीनो वो डॉक्टर, तुम और मैं जानते है। आगे किसी चौथे को पता नही चलना चाहिए।

विजय – (उनके हाथ पकड़कर) – ना  मालकिन ना केसी बाते करते हो ? आपकी इज़्ज़त पे आंच नही आने देगा ये विजय, चाहे उसके लिए मेरी जान क्यों न चली जाये।

मालकिन – चलो गाड़ी चलाओ मुझे अभी घर जाना है।

विजय – जो हुक्म मालकिन।

विजय गाड़ी लेकर हवेली आ गया पर सारे रास्ते में मालकिन रोती रही।

शांति – क्या हुआ मालकिन आपका चेहरा उत्तरा उत्तरा सा क्यों लग रहा है?

मालकिन – नही कुछ नही शांति।

शांति – क्या हुआ मालिक की याद आ गयी क्या ?

मालकिन – हाँ कुछ ऐसा ही समझ लो। तुम जाओ और विजय को मेरे कमरे में भेजो।

शांति ने विजय को भेज दिया।

विजय – आपने बुलाया मालकिन?

मालकिन – हाँ विजय आओ और आते वक़्त कमरा अंदर से बन्द करते आना।

विजय ने ज्यादा सवाल नही किये और आकर उनके बेड के पास खड़ा हो गया।

विजय – बोलो मालकिन क्या हुक्म है मेरे लिए?

मालकिन – देखो विजय तुमसे एक बात करनी है।

विजय – हां जी फरमाइए।

मालकिन – तुम्हारे पुरखो ने हमारा कितना क़र्ज़ देना है? ये तो तुम भी जानते हो !!

विजय – हांजी पता है बहुत बड़ी रकम है। पर आप चिंता न करो हम आपकी पाई पाई चूका देंगे।

मालकिन – मुझे तुमसे एक सौदा करना है।

विजय – कैसा सौदा मालकिन ?

मालकिन – यदि तुम चाहो तो तुम्हारा सारा क़र्ज़ माफ़ हो सकता है।

विजय – (हैरानी से) – क्या बोला आपने मालकिन ???

मालकिन – हाँ दुबारा सुनो, तुम चाहो तो तुम्हारा क़र्ज़ माफ़ हो सकता है वो भी पूरे का पूरा।

विजय – हाँ ये बात तो समझ आ गयी, पर मुझे करना क्या होगा?

मालकिन – अपनी एक बहुत ही कीमती चीज़, मुझे देनी होगी। सोच लो !!

विजय – मेरे पास ऐसी क्या कीमती चीज़ है जिसके बदले में मेरा क़र्ज़ माफ़ जो सकता है।

मालकिन – आज रात तक सोच लो सुबह यही आकर बात करेंगे, और हाँ किसी से इसके बारे में ज़िक्र न करना। अब जाओ तुम अपने घर, सुबह टाइम से आ जाना।

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