Shushma Ki Chut Me Ushma – Part I


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vikky360001 2015-05-25 Comments

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Shushma Ki Chut Me Ushma – Part I

हाइ दोस्तों में आपका विकी… में एक यंग डॉक्टर हु और अब की बार एक बहोत अजीबो गरीब कहानी लेके आया हु. दोस्तों ये कहानी ज्यादातर काल्पनिक है पर जिन जिन पात्रो को में बता रहा हु उसको मैंने वास्तव में भरपूर चोदा हे, यह बात सो फी सदी सत्य है. मेरी कहानी एक एक शब्द आपके मन में अगर मेरी चुदाई का चित्र खड़ा न करे तो आपके लंड या चूत से पानी कैसे बहेगा..उसमे आग कैसे लगेगी. तो मेरी कहानी जरा धीरज रखे हुए ध्यान से पढ़े. अपने मन की इच्छाओ को संतुष्ट करना कोई बुरी बात या पाप नहीं, लेकिन औरतो की इज्ज़त करना भी एक बड़ी बात हे. वो कोई बदनाम न हो इस लिए मैंने केवल शहर और पात्रो के नाम बदले है. पर मेरी हर कहानी की तरह यह पूरी सीरीज आपको बड़ी रोचक और लंड, चूत सुजानेवाली बड़ी ही रोचक लगेगी यह मेरा वादा हे. वासना शरीर में नहीं मन में होती हे…अगर यह कहानी आपके दिल के साथ साथ अगर आपके लंड या चूत को छू जाये तो दोस्तों आप मुझे मेल अवस्य करे. मुझे आपके मेल अच्छे लगते है. हां अपनी काम समस्या मुझे अवश्य बताए..(आपकी पहचान गुप्त रखी जाएगी यह मेरा दिल से आपको वादा हे दोस्तों..)

पढाई में अव्वल आने में केवल ११% कम होनेकी वजह से मुझे बम्बई की जगा राजस्थान की एक अस्पताल में डॉक्टर की जॉब मिली. तब में शायद २४ साल के आस पास का हो चूका था और मेरे डॉक्टर होने पर पापा ने खुश होके मुझे कार दिलवाई थी. में अपना सामान लेके अहमदाबाद से जयपुर तक अपनी कार लेके सुबह १० बजे पंहुचा. मुझे १२ बजे अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. दस्तूर से मिलना था. में सुबह वहा पहोच कर पहेले एक होटल में शेव, स्नान करके चिकना तैयार हुआ और पंहुचा राजस्थान की बहेतारिन हॉस्पिटल में.

रिसेप्शन पे एक २२ साल की सुन्दर लड़की (साहिस्ता) ने मुझे स्माइल देते हुए वेलकम कर, गुड मोर्निंग कह मेरी अच्छी खातिरदारी की. मैंने अपना अपॉइंटमेंट लैटर देके डॉ. अमित दस्तूर से मिलने को कहा..

साहिस्ता: (मुझे ऊपर से लेके निचे तक बड़ी अजीब से निगाहों से देखते एक मादक स्माइल दिया और बोली) ओह्ह सर तो आप डॉक्टर है?

में: हा….मेम, सिविल सर्जन साब से आज १२ बजे मेरी मुलाकात होनी हे क्या आप बताएगी वो कहा मिलेगे?

साहिस्ता: ओह्ह्ह सॉरी.. डॉ दस्तूर एक इमरजेंसी ऑपरेशन में गए है आप अपने जूते वहा डॉक्टर रूम में निकाल वहा से डॉक्टर्स की स्पेशल चप्पल होगी उसे पहेनकर डॉ. सुषमा की केबिन में जाए और उसे यह लैटर दे में उनसे इंटरकॉम से बात कर लेती हु. पहले सर आप प्लीज वहा जाइए और जूते उतारके अन्दर जाये. मेने उसके सामने देखा…तो वो बोली, सॉरी.. सर..पर यहाँ अस्पताल में डॉक्टर्स जूते नहीं पहेनते यही नियम हे..प्लीज जरा अपने जूते और सॉक्स वहा उतर कर ही जाये. थैंक्स..

में: ओके थैंक यू….मेम…..(सोचने लगा कही कपडे भी न उतार ने पड़े)

में जूते उतार के चप्पल पहेनकर डॉ. सुषमा के पास चल दिया (उसने इन्टरकॉम से डॉ. सुषमा में मेरे आने की सुचना दे के मुझे वहा भेज दिया.)

में: (केबिन को नॉक करते हुए) क्या में अन्दर आ सकता हु…?

सुषमा: (मादक हसी के साथ) अररररे हां डॉक्टर आप पुरे के पुरे अन्दर आ जाइये (हम दोनो हंस पड़े)

में: गुड मोर्निंग डॉक्टर..(वो बिच में ही…हां में डॉ सुषमा सेठ, आपका लैटर मैंने ही भेजा था, आइये)

सुषमा: वैरी गुड मोर्निंग डॉ, हमारे मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में आपका बहोत बहोत स्वागत हे. (उन्हो ने सुन्दर मुलायम गोरा हाथ मेरी तरफ मिलाने को बढाया)

मैंने उस से हाथ मिलाते हुए उनकी सामनेवाली चेर पर बैठा. उनके गुलाबी कोमल हथेली को छुआ तो मुझे बिजली का करंट लगा, वो मुस्कान बिखेरते हुए….हां लाइए…जी…

मैंने अपना अपोइटमेंट लेटर उसे दिया और कहा..

में: हेल्लो में… अपना नाम बताया और डॉ. दस्तूर से मेरी अपोइन्टमेंट हे.., यह लैटर……..(वो बिच में ही..)

सुषमा: हां पता हे बैठये और चाय पानी तो पीजिये सब होगा… साब बिजी हे…. बाबा…
उसने कोफ़ी मंगवाई.. और अपनी आंखे नाचते हुए..

सुषमा: (कोफ़ी पीते हुए) तो डॉ. कैसा लगा अपना अस्पताल? चलो में तुमे अपने अस्पताल से परिचय करा दू.

(वो मेरी तरफ जरा जुक के बैठी तो उसकी मांसल चुचिया मेरी आँखों के सामने लचक्के जुल पड़ी, उसने पारदर्शी साडी पहनी थी तो उसमे से उनके ब्लाउज के अन्दर छुपी उसकी मस्त मांसल गोरी चुचिया साफ़ दिखाई दे रही थी). में एक नज़र उसे ताक ही रहा था और उसके बदन से मदमस्त खुश्बू में डूब रहा ही था की…)

सुषमा: (मेरी तरफ शरारत से देखते हुए), सुनिए आप ठीक हे ना? कहा खो गए…(में जपक के जागा) सुनो..यंग मेन, इस अस्पताल में ३५ कमरे १५० बेड्स, ४ ऑपरेशन थिएटर, ७ विभाग, ३२ नर्सेज, २४ डॉक्टर्स, आपको मिलकर अब २५, और ५ लोग कारभारी लोग हे. इसके अलावा १० सफाई कामदार और ३ पयोन हे. में तो उसकी मस्त अदाए देख रहा था, और उसकी नशीली आँखों में डूब रहा था, उसकी बातो में मेरा ध्यान ही नहीं था. उसने सबसे पहेले मुझे सारा अस्पताल दिखया, जोकि पूरा सेंट्रली ऐ.सी है. ग्राउंड फ्लोर पे OPD और जनरल चेकउप, डॉक्टर्स केबिन, मेडिकल स्टोर, कॅश विभाग, रिसेप्शन हे. फर्स्ट फ्लोर इनडोर पेशेंट्स और ऑपरेशन थिएटरस के लिए, सेकंड फ्लोर नर्सेज और डॉक्टर्स के रेसिडेंट के लिए हे.

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